लखनऊ उत्तर प्रदेश के रायबरेली में उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे में दो परिवारीजनों की मौत के मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत 10 लोगों के खिलाफ सोमवार को हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। विपक्ष ने लखनऊ से दिल्ली तक सरकार को घेरने की कोशिश की। चौतरफा दबाव के बाद देर रात सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच की सिफारिश को मंजूरी दे दी। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कार में ट्रक द्वारा मारी गई टक्कर को सड़क दुर्घटना बताया था लेकिन अब कई ऐसे ‘सुराग’ सामने आए हैं जो इस घटना के पीछे गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। गैंगरेप पीड़िता के परिवार वाले घटना के बाद से ही इसके पीछे बीजेपी विधायक की साजिश बता रहे हैं। उनका आरोप है कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई के इशारे पर उनकी कार में टक्कर मरवाई गई है। हालांकि डीजीपी ने दावा किया कि राज्य सरकार इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई चाहती है। साथ ही डीजीपी ने रेप पीड़िता की सुरक्षा में किसी तरह की चूक से इनकार भी किया है। ऐसे उठ रहे हैं सवाल अधिकारियों के बयानों में अंतर जिस ट्रक (यूपी-71-एटी- 8300) ने रायबरेली के गुरुबक्शगंज इलाके में रेप पीड़िता की कार में टक्कर मारी, उसकी नंबर प्लेट पर ग्रीस पुती थी। यानी ग्रीस के जरिए ट्रक का नंबर छिपाया गया था। इसको लेकर पुलिस के दो बयान हैं, जो एक दूसरे से मैच नहीं खाते। सुबह बताया गया कि बांदा से मौरंग लेकर आने वाले ट्रक ओवर लोडिंग करते हैं। ऐसे में ई-चालान से बचने के लिए ट्रक वाले अपनी नंबर प्लेट पर ग्रीस लगा कर नंबर छुपा लेते हैं। उधर, दोपहर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडीजी जोन एडीजी राजीव कृष्ण ने ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल से पूछताछ के आधार पर नंबर प्लेट पर ग्रीस लगाने के पीछे दूसरा तर्क दिया। बकौल, एडीजी ट्रक मालिक फाइनेंस करने वालों को बकाए का किस्तें नहीं दे पाया था, इसलिए उन लोगों से बचने के लिए नंबर प्लेट पर ग्रीस लगा रखी थी। यह भी जानकारी मिली की उक्त ट्रक का बीमा भी खत्म हो चुका था। रॉन्ग साइड कैसे आया ट्रक प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना के समय पीड़िता की कार (जिसे उनका वकील चला रहा था) अपनी साइड में थी। रोड पर डिवाइडर न होने से ट्रक ने रॉन्ग साइड आकर कार में टक्कर मारी। इस पर एडीजी का कहना था कि जिस समय घटना हुई, वहां तेज बरसात हो रही थी। उन्होंने कहा कि फरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। टीम ट्रक के पहिए के निशानों के आधार पर इसकी रिपोर्ट देगी। इस बीच लखनऊ से फरेंसिक टीम के एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. रविकांत शर्मा और डॉ. प्रतिभा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। उधर, पीड़िता के परिवार का यह भी आरोप था कि घटना के समय वहीं एक कार से विडियोग्राफी की जा रही थी। घटना की विडियोग्राफी भी साजिश के शक को और पुख्ता करती है। हालांकि, एडीजी राजीव कृष्ण ने कहा कि इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रख कर विवेचना की जा रही है। दो पुरुष गनर मांगे थे, वे भी नहीं मिले पीड़िता की बहन का आरोप था कि उन लोगों ने महिला सिपाहियों की जगह दो पुरुष गनर मांगे थे, लेकिन उन्नाव प्रशासन ने नहीं दिए। एक गनर छुट्टी पर जाता था, तो सुरक्षा में कोई नहीं रहता था। हालांकि वह रविवार को सुरक्षाकर्मियों के साथ न होने पर कोई जानकारी नहीं दे पाईं। उधर, एडीजी लखनऊ जोन ने बताया कि रेप पीड़िता को 10 सुरक्षाकर्मी दिए गए हैं। 7 पुलिसकर्मी घर की सुरक्षा में रहते हैं, जबकि, तीन (दो महिला और एक पुरुष) पीड़िता के साथ में। एडीजी ने बताया कि रविवार को रायबरेली जाते समय रेप पीड़िता ने यह कहते हुए सुरक्षाकर्मियों को साथ ले जाने से इनकार कर दिया था कि कार में जगह नहीं है।
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